RRB Group D में नॉर्मलाइजेशन को लेकर कई सारे अभ्यर्थियों के मन में सवाल आते रहते हैं। यदि आप भी जानना चाहते हैं कि रेलवे ग्रुप डी में नॉर्मलाइजेशन क्यों और कैसे होता है तो इस अपडेट को पूरा पढ़ें। यह अपडेट आपको रेलवे ग्रुप डी परीक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी देगा।
रेलवे Group D की परीक्षा देश के सबसे बड़ी प्रतियोगिता परीक्षाओं में से एक माना जाता है। केवल ग्रुप डी ही नहीं बल्कि रेलवे के द्वारा आयोजित किए जाने वाले एनटीपीसी, एसएससी, बैंकिंग, पुलिस तथा टेक्निकल्स एग्जाम आदि में भी नॉर्मलाइजेशन की पद्धति अपनाई जाती है। यह पद्धति सीधे तौर पर अगर बात करें तो परीक्षा के शिफ्ट अलग-अलग सेट में पूछे जाने वाले प्रश्नों को लेवल के आधार पर किया जाता है।
RRB Group D में नॉर्मलाइजेशन क्यों होता है?
रेलवे ग्रुप डी की परीक्षा में देशभर के लाखोंउम्मीदवार भाग लेते हैं। इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के होने कारण एक ही दिन एक ही शिफ्ट में परीक्षा करना संभव नहीं होता है। इसीलिए ग्रुप डी की परीक्षा को कई दिन और कई शिफ्ट में आयोजित किया जाता है। हर शिफ्ट में प्रश्नों का लेवल थोड़ा अलग हो सकता है।
किसी शिफ्ट का पेपर आसान होता है, तो किसी शिफ्ट का पेपर मध्य और किसी शिफ्ट का पेपर ज्यादा कठिन होता है। इसी अंतर को बराबर करने के लिए रेलवे भर्ती बोर्ड ने आरआरबी ग्रुप डी में नॉर्मलाइजेशन सिस्टम लागू करता है।
इस नॉर्मलाइजेशन सिस्टम के अपने से किसी छात्रों को अनुचित लाभ नहीं होता है और ना ही किसी छात्रों कोअभ्यर्थियों को नुकसान होता है।
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RRB Group D में नॉर्मलाइजेशन CBT स्टेज पर लागू होता है
रेलवे ग्रुप डी के चयन प्रक्रिया में नॉर्मलाइजेशन केवल कंप्यूटर आधारित परीक्षा में ही लागू होता है। शारीरिक दस्त परीक्षण (PET) में नॉर्मलाइजेशन नहीं होता है। यह परीक्षा केवल क्वालीफाइंग नेचरकरने के लिए होता है। कई बातों को ध्यान में रखकर ग्रुप डी के कंप्यूटर आधारित परीक्षा में नॉर्मलाइजेशन किया जाता है, जिसका विवरण आप नीचे देख सकते हैं।
RRB द्वारा नॉर्मलाइजेशन के लिए निम्न बातों को ध्यान में रखा जाता है:
- हर शिफ्ट के उम्मीदवारों का औसत प्रदर्शन (Average Marks)
- उस शिफ्ट के टॉप स्कोर (Highest Marks)
- सभी शिफ्टों के उम्मीदवारों की कुल संख्या
- इन सभी आंकड़ों के आधार पर एक Standard Formula के जरिए Raw Marks को Normalized Marks में बदला जाता है।
नोट: RRB फार्मूला सार्वजनिक नहीं करता, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑटोमैटिक और पारदर्शी होती है।
Group D नॉर्मलाइजेशन का आसान उदाहरण
मान लीजिए:
शिफ्ट A (आसान)
शिफ्ट B (कठिन)
| शिफ्ट प्राप्त अंक (Raw) | नॉर्मलाइजेशन के बाद |
| A 85 | 82 |
| B 74 | 80 |
यहाँ देखा जा सकता है कि
👉 कठिन शिफ्ट वाले उम्मीदवार के अंक बढ़ाए गए,
👉 आसान शिफ्ट वाले के अंक थोड़े घटाए गए।
इससे न्यायपूर्ण तुलना संभव होती है।
Group D उम्मीदवारों के लिए जरूरी सलाह
रेलवे ग्रुप डी के सभी परीक्षार्थियों को सलाह है कि आप नॉर्मलाइजेशन की चिंता ना करें। शिफ्ट आसान हो या कठिन आपकोचिंता करने की आवश्यकता नहीं है। सिर्फ अधिक से अधिक प्रश्नों का सही उत्तर देने का प्रयास करें। नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया से अपने आप बैलेंस हो जाएगा। नॉर्मलाइजेशन एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके माध्यम सेकिसी का हक नहीं छीना जाता बल्कि कठिन शिफ्ट वालेको राहत देने का काम करता है।
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